
जापान की Tokyo Electric Power Company (TEPCO) ने बताया है कि Fukushima Daiichi और Daini न्यूक्लियर प्लांट्स से कामगारों को सावधानीवश ऊंचे स्थानों पर पहुंचाया गया है।
हालिया सुनामी चेतावनियों को देखते हुए यह एहतियाती कदम उठाया गया है। TEPCO के मुताबिक,
“अब तक दोनों प्लांट्स में कोई संरचनात्मक नुकसान या रेडिएशन लीक दर्ज नहीं हुआ है।”
2011 का भयानक हादसा अब भी ताज़ा यादों में
2011 में जापान में आए 9.0 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद आई भीषण सुनामी ने फ़ुकुशिमा दाइची प्लांट में तबाही मचा दी थी।
इस हादसे को चेरनोबिल के बाद सबसे बड़ा परमाणु संकट माना गया था।
तब से TEPCO लगातार रेडिएशन क्लीनअप और रिसाव नियंत्रण के लिए काम कर रही है।
ईंधन मलबा हटाने में 15 साल की देरी? TEPCO की नई घोषणा
हफ्ते की शुरुआत में TEPCO ने कहा कि रेडिएशन से ग्रस्त ईंधन मलबा (fuel debris) को पूरी तरह से हटाने में 12 से 15 साल तक की और देरी हो सकती है।
इसका कारण:
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तकनीकी जटिलताएं
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रेडिएशन के उच्च स्तर

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और सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देना
TEPCO ने बयान में कहा:
“हम नहीं चाहते कि जल्दबाज़ी में रेडिएशन रिसाव का खतरा और बढ़े।”
सुनामी चेतावनी पर नज़र, लेकिन स्थिति नियंत्रण में
जापान की मौसम एजेंसियों द्वारा कमचटका भूकंप के बाद प्रशांत क्षेत्र के कई हिस्सों में सुनामी चेतावनी जारी की गई है।
हालांकि TEPCO ने साफ़ किया है कि फिलहाल प्लांट को कोई खतरा नहीं है, और सभी गतिविधियों पर 24×7 निगरानी की जा रही है।
परमाणु सुरक्षा में देरी, पर पारदर्शिता जारी
भले ही मलबा हटाने की प्रक्रिया में वर्षों की देरी हो, लेकिन TEPCO की ओर से सुरक्षा उपायों और जानकारी साझा करने में पारदर्शिता एक सकारात्मक संकेत है।
जापान एक बार फिर बता रहा है कि परमाणु तकनीक में रफ्तार से ज्यादा जरूरी है सावधानी।
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